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अब बस समय की बात है कि उन्हें फिर से बाहर का रास्ता दिखाया जाए
कोलकाता। लोकसभा में ध्वनि प्रस्ताव से स्पीकर चुने जाने के बाद तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने संसद के बाहर आकर इस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है की पूरी प्रक्रिया ही विसंगत रही है। आभिषेक ने अपनी टिप्पणी में कहा कि नियम कहता है कि अगर सदन का कोई सदस्य मत विभाजन की मांग करता है, तो सदन के प्रोटेम स्पीकर को मत विभाजन देना होता है।
आप लोकसभा के फुटेज में साफ देख और सुन सकते हैं कि विपक्षी खेमे के कई सदस्यों ने मत विभाजन की मांग की है और प्रस्ताव को वोटिंग के लिए रखा है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को वोटिंग के लिए रखे बिना ही पारित कर दिया गया। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सत्तारूढ़ दल, भाजपा के पास संख्या बल नहीं है।यह सरकार बिना संख्या बल के चल रही है। यह अवैध, अनैतिक, अनैतिक और असंवैधानिक है और देश के लोगों ने पहले ही उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अब बस समय की बात है कि उन्हें फिर से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि मत विभाजन की कितनी जोरदार मांग की गई। नियम कहता है कि अगर 500 लोगों में से एक भी मत विभाजन की मांग करता है, तो उसे मत विभाजन देना ही होगा। यही नियम है। कांग्रेस ही नहीं, कई राजनीतिक दलों ने मत विभाजन की मांग की। आप मुझसे पूछ रहे हैं। मुझसे सवाल पूछने से पहले लोकसभा की फुटेज देखिए। उन्होंने कहा कि केवल प्रोटेम स्पीकर ही स्पष्ट कर सकते हैं कि मत विभाजन क्यों नहीं दिया गया। वे कुर्सी पर बैठे थे, इसलिए वे ही जवाब दे सकते हैं।